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पंजाब में है पैरिस जैसा एक शहर, क्या जानते हैं आप इसके बारे में?

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पंजाब की मिट्टी अपनी हरियाली, वीरता और मानवसेवा के लिए जानी जाती है। आज भी यहाँ लोग जमकर खेती करते हैं और यह राज्य सबसे ज्यादा गेहूँ उत्पादन करता है। गुरुद्वारों और सिखों की धरती यूँ तो दो देशों में बंट चुकी है, पाँच नदियों वाले पंजाब की तीन नदियाँ ही अब भारत के हिस्से में है लेकिन खूबसूरती अब भी भरपूर है। पंजाब की कुछ ज्यादा लोकप्रिय जगहों की यात्रा करते अगर आप कुछ नई जगहों को ट्राई करना चाहते हैं तो कपूरथला को चुन सकते हैं। कहा जाता है कि पंजाब में अगर कहीं पेरिस की झलक मिलती है तो वो कपूरथला ही है।

कपूरथला

हमलोगों ने फिल्मों और अन्य माध्यमों से जान रखा है कि पंजाब के लोगों में कनाडा को लेकर अजीब आकर्षण होता है। ज्यादातर पंजाबी वहाँ जाना चाहते हैं लेकिन आइए मैंआपको पंजाब के पेरिस की सैर कराता हूँ। दरअसल कपूरथला में ब्रिटिश राज के दौरान रजवाड़े हुआ करते थे जो कि बाद में अन्य जगहों की तरह ही आजादी के बाद भारत में मिले। संस्थापक नवाब कपूर सिंह के नाम पर बना कपूरथला को पेरिस कहने के पीछे के कारण को आप ज़रूर जानना चाहेंगे। आज जब देशभर में अभियान चलाकर स्वच्छता के लिए लोगों को प्रेरित किया जाता है, कपूरथला अपनी स्वच्छता को लेकर ही पंजाब के पेरिस के रूप में जाना जाता है। इसका सुनहरा इतिहास, खूबसूरत इमारतें और सड़कें देखने लोग दूर-दूर से आते हैं।

शहर में घूमते हुए वास्तुकला से इंडो-सारसेन और फ्रांसीसी शैली की झलक आपको अभिभूत करती है। आइए जानते हैं कि कपूरथला जाकर आप क्या सब देख सकते हैं:

जगतजीत महल

1908 में बनकर तैयार हुआ जगतजीत महल कपूरथला के महाराज जगजीत सिंह का निवास स्थान था। 200 एकड़ जमीन में फैला ये महल अपनी वास्तुकला को लेकर मशहूर है। इसे देखकर आपको पैलेस ऑफ वर्सेलस और फाउंटेनब्लूे की याद आ जाती है। फ्रैंच वास्तुनकार एम. मार्कल ने इसे ख़ास डिज़ाइन से सजाया हुआ है। इसका दीवान-ए-खास जिसे दरबार हॉल भी कहा जाता है, पर्यटकों का मन मोह लेता है। प्लाास्टर ऑफ पेरिस की प्रतिमाएँ और पेंटिंग्स आपको मुग्ध करती हैं। फिलहाल इसे सैनिक स्कूल में तब्दील कर दिया गया है।

एलिसी महल

इमारतों और वास्तुकला के शहर कपूरथला में ऐसे अनेक महल हैं जो आपको निहारने के लिए आमंत्रित करते हैं। इनमें से एलिसी महल इंडो-फ्रेंच वास्तुकला के अनुपम मेल को दर्शाता है। साल 1962 में बिक्रम सिंह ने इस महल का निर्माण करवाया था। अभी इस महल में मोंटगोमरी गुरु नानक स्कूल को संचालित किया जाता है। लेकिन ये आज भी टूरिस्टों के पसंदीदा जगहों में शुमार है।

कब और कैसे पहुँचें?

कपूरथला की यात्रा के लिए अक्टूबर से मार्च का महीना सबसे बेहतरीन समय होता है। इस समय मौसम टूरिस्टों के लिए अनुकूल होता है। अमृतसर हवाईअड्डा यहाँ से 82 कि.मी. दूर है। लिहाजा हवाई जहाज से भी आप अमृतसर आकर फिर सड़क से कपूरथला पहुँच सकते हैं। कपूरथला में रेलवे स्टेशन मौजूद है और बस स्टेशन भी हो जो कि इसे विभिन्न प्रमुख शहरों से जोड़े हुए है।

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