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ईको टूरिज्‍म का बनने जा रहा नया सर्किट, आगरा-चंबल और इटावा लॉयन सफारी का पर्यटक ले सकेंगे आनंद

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आगरा-चंबल-इटावा सर्किट को इको-टूरिज्म के रूप में विकसित करने के लिए शासन स्तर से कवायद शुरू हो गई है। आगरा, चंबल और इटावा के नौ ऐसे स्थानों को चिन्हित किया गया है, जिनके माध्यम से इको टूरिज्म को बढ़ावा दिया जाएगा। ताज रोड स्थित होटल में वन विभाग और उत्तर प्रदेश इको टूरिज्म के संयुक्त तत्वावधान में कान्क्लेव में टूरिज्म गिल्ड और होटल व्यवसायियों से सहयोग और योजना संबंधी चर्चा हुई है।

इन नौ स्थानों को किया चिन्हित

ताज नेचर वाक, कीठम स्थित सूरसरोवर, कीठम भालू संरक्षण केंद्र, चुरमुरा स्थित हाथी संरक्षण केंद्र, नेशनल चंबल वाइल्डलाइफ सेंचुरी, नंदगवा स्थित नेचर इंटरप्रिटेशन सेंटर, इटावा सफारी पार्क।

गांवों और जंगल की सीमा में रहने वालों से लेंगे सहयोग

कान्क्लेव में फैसला लिया गया कि आगरा, चंबल और इटावा के इन नौ चिन्हित स्थानों के पास के गांवों औ जंगलों के पास रहने वाले लोगों से सहयोग लिया जाएगा। इन स्थानों को बढ़ावा देने के लिए। ऐसे घरों को भी ढूंढा जाएगा, जिन्हें होम स्टे में बदला जा सके।

ज्यादा होंगी गतिविधियां

इको टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए आगरा-चंबल- इटावा में नेचर कैंप, ट्रैकिंग, एडवेंचर स्पोर्ट्स, फोटो सफारी, फासिल सफारी व स्काइ गेजिंग कराई जाएगी।

हाथियों को नहलाएं और खिलाएं

चुरमुरा स्थित हाथी संरक्षण केंद्र पर पर्यटकों को लुभाने के लिए हाथियों को नहलाने के लिए क्या सुविधा हो सकती है, इसकी जानकारी वाइल्डलाइफ एसओएस के डायरेक्टर कंज़रवेशन प्रोजेक्ट्स बैजूराज एमवी से ली गई। इस पर बैजूराज ने बताया कि केंद्र पर 28 हाथी हैं, जिनका इलाज चल रहा है। ऐसे में आम लोगों के साथ वे कैसा बर्ताव करेंगे, यह असुरक्षित हो सकता है। उन्होंने सुझाव देते हुए कहा कि हाथियों को दूर से नहाते देखना या खाना खिलाना संभव है। इस संबंध में योजना बनाई जा सकती है। इसके साथ ही सेल्फी विद एलीफेंट भी शुरू करने की योजना है।

लगातार हो रहा है विकास

कान्क्लेव में जानकारी दी गई कि चंबल नदी में 1970 में 200 घड़ियाल थे, जिनकी संख्या अब लगभग दो हजार है। इसी तरह इटावा लायन सफारी में भी तीन शेर हैं, जिसमें से एक नर व दो मादा हैं। यहां वैक्सीन सेंटर भी विकसित किया गया है, जहां से गिर नेशनल पार्क से भी वैक्सीन मंगवाई जाती हैं।

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