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फैशन और स्टाइल के लिए मशहूर रहा काबुल, आजादी से घूमती थीं महिलाएं, जानिए तालिबान के आने से पहले कैसा था अफगानिस्तान?

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 दशकों तक अफगानिस्तान दुनिया के सबसे ताकतवर देशों के लिए अपनी ताकत दिखाने की प्रयोगशाला बना हुआ था। 9/11 के बाद जिस तरह से अमेरिका की सेना ने दोबारा यहां कदम रखा उसके बाद माना जा रहा था कि यहां हालात बेहतर हो सकते हैं, लेकिन ऐसा हो नहीं सका। फिलहाल अफगानिस्तान में अभी के हालात यह हैं कि तालिबान ने कंधार, काबुल समेत पूरे अफगानिस्तान पर नियंत्रण कर लिया है। अमेरिका द्वारा प्रशिक्षित सैनिक यहां से जान बचाकर भाग रहे हैं और ये लोग तजाकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान में जान बचाने के लिए छिप रहे हैं। यहां तक कि अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी भी देश छोड़कर चले गए हैं।

आज पूरी दुनिया अफगानिस्तान को तरस भरी निगाहों से देख रही है. दुनिया की लगभग हर महिला उन अफगान महिलाओं को लेकर चिंता जता रही है, जिन्होंने उड़ने के लिए अपने पंख फैलाने शुरू ही किए थे. सोशल मीडिया पर अफगानिस्तान के प्रति एकजुटता दिखाई जा रही है . और यहां की पुरानी तस्वीरें भी खूब शेयर हो रही हैं. जिनसे साफ देखा जा सकता है कि तब का काबुल, अब के काबुल से पूरी तरह अलग था.

अमेरिका के नेतृत्व में नाटो सेनाओं ने जिस तालिबान को 2001 में सत्ता से बेदखल कर दिया था, अब 20 साल बाद एक बार फिर देश का बड़ा हिस्सा उसके कब्जे में आ गया है. रिपोर्ट्स के अनुसार, तालिबान ने अपने कब्जे वाले इलाकों में क्रूर कानूनों को लागू करना शुरू कर दिया है. जिनमें महिलाओं के ऊपर बंदिशों का गहरा बोझ लाद दिया गया है. इन्होंने 15 साल से ऊपर की लड़कियों और 45 साल से कम उम्र की विधवा महिलाओं की लिस्ट सौंपने को कहा है.

कब्जे वाले इलाकों में ही जबरन लड़ाकों की शादी महिलाओं से कराई जा रही है. महिलाओं के घर से निकलने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है और वह केवल पुरुष साथी के साथ ही घर से बाहर निकल सकती हैं. उनके लिए बुर्का पहनना अनिवार्य कर दिया गया है और पढ़ाई-लिखाई पर रोक लग गई है . आपको ये जानकर हैरानी होगी कि अफगानिस्तान हमेशा से ऐसा नहीं था. एक समय था, जब ये देश भी फैशन, रोजगार और करियर के मामले में काफी आगे था.

सोशल मीडिया पर वायरल पुरानी तस्वीरों में अफगान महिलाएं और पुरुष यूरोपीय लोगों की तरह ही फैशनेबल दिखाई दे रहे हैं. लेकिन आज के अफगानिस्तान के लिए ये सब किसी सपने जैसा है . क्योंकि कट्टरपंथी तालिबानी संगठन ने सबकुछ बदलकर रख दिया है. पुरानी तस्वीरों में अफगानिस्तान एक फैशन हब जैसा लग रहा है. 70 के दशक की एक तस्वीर में महिलाओं ने फैशनेबल कपड़े पहने हुए हैं और उनके बालों का स्टाइल बेहद खास है. लेकिन आज के समय में वो बिना बुर्के के नहीं रह सकतीं.

लोग उस वक्त को याद कर रहे हैं, जब महिलाएं भी अपना करियर बनाती थीं. सब कानून व्यवस्था के मुताबिक चलता था. सरकार विकास कार्यों को करने में सक्षम थी और हर किसी को आजादी थी. लेकिन करीब चार दशक तक चले युद्ध ने सबकुछ खत्म कर दिया है. आज की महिलाओं में अपनी सुरक्षा को लेकर डर है . तलाकशुदा महिलाओं के लिए स्थिति और भी भयंकर है. क्योंकि इनके लिए एक रुढिवादी समाज में कोई स्थान ही नहीं है.

अफगानिस्तान में पर्यटन

 1970 के दशक की शुरुआत में सरकारी सहायता के साथ विकसित अफगानिस्तान का पर्यटन उद्योग आंतरिक राजनीतिक अस्थिरता के कारण 1979 से नगण्य रहा है। अफगानिस्तान में प्रवेश के लिए पासपोर्ट और वीज़ा की आवश्यकता है। 1 999 में, संयुक्त राष्ट्र ने काबुल में $ 70 अमरीकी डालर पर रहने की दैनिक लागत का अनुमान लगाया। इन लागतों में से लगभग 61% गेस्टहाउस में एक कमरे की कीमत होने का अनुमान लगाया गया था। होटल के लिए इसकी उच्च दर भी है। तालिबान और अल-कायदा के खिलाफ अमेरिका के नेतृत्व वाले अभियान के चलते यात्रा देश में अत्यधिक प्रतिबंधित थी।अफगान दूतावास सालाना 15,000 से 20,000 पर्यटक वीजा के बीच जारी करते हैं। 2014 में, अफगानिस्तान में साहसिक यात्राओं के लिए बुकिंग दोगुनी हो गई थी।

सिंधु घाटी सभ्यता शहरों

सिंधु घाटी सभ्यता कांस्य युग सभ्यता (3300-1300 ईसा पूर्व, परिपक्व अवधि 2600-19 00 ईसा पूर्व) थी जो आज उत्तर-पश्चिम पाकिस्तान और उत्तरपूर्वी अफगानिस्तान के उत्तर-पश्चिम पाकिस्तान से फैली हुई है। उत्तरी अफगानिस्तान में शॉर्टुगाई में ओक्सस नदी पर एक सिंधु घाटी स्थल पाई गई है। शॉर्टुघई पर्यटकों के अलावा दक्षिणी अफगानिस्तान में मुंडीगाक जा सकते हैं जो एक और उल्लेखनीय साइट है।

अफगानिस्तान का राष्ट्रीय संग्रहालय

संग्रहालय संग्रह पहले मध्य एशिया में सबसे महत्वपूर्ण था, जिसमें कई सहस्राब्दी से 100,000 से अधिक वस्तुओं की डेटिंग हुई थी। 1 99 2 में गृहयुद्ध की शुरुआत के साथ, संग्रहालय को कई बार लूट लिया गया जिसके परिणाम स्वरूप 100,000 वस्तुओं का प्रदर्शन 70% था। 2007 से, कई अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने 8,000 से अधिक कलाकृतियों को पुनर्प्राप्त करने में मदद की है, हाल ही में जर्मनी से चूना पत्थर की मूर्ति है। 2012 में यूनाइटेड किंगडम द्वारा लगभग 843 कलाकृतियों को वापस कर दिया गया, जिसमें प्रसिद्ध 1 शताब्दी बाग्राम आइवरी शामिल हैं।

बाबर गार्डन

बाबर के गार्डन अफगानिस्तान के काबुल में एक ऐतिहासिक पार्क है, और पहले मुगल सम्राट बाबर के अंतिम विश्राम स्थान भी हैं। माना जाता है कि उद्यान 1528 ईस्वी (9 35 एएच) के आसपास विकसित किए गए थे, जब बाबुर ने काबुल में ‘एवेन्यू गार्डन’ के निर्माण के आदेश दिए थे, जो उनके संस्मरण, बाबर्णमा में कुछ विस्तार से वर्णित थे। अकेला ग्रह पार्क को “काबुल में सबसे प्यारा स्थान” के रूप में वर्णित करता है।

काबुल चिड़ियाघर

ब्याज की एक और जगह काबुल चिड़ियाघर है। यह काबुल नदी के किनारे अफगानिस्तान के काबुल में स्थित है। 2010 तक, चिड़ियाघर में लगभग 280 जानवर हैं, जिनमें पक्षियों और स्तनधारियों की 45 प्रजातियां और मछली की 36 प्रजातियां शामिल हैं। जानवरों में से दो शेर और अफगानिस्तान के एकमात्र सुअर हैं। सप्ताहांत के दौरान 10,000 लोग यात्रा करते हैं।

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