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मालदीव की तर्ज पर भारत में बनेंगे ‘वाटर विला’ जानिए खास बातें

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अगर आप परिवार के साथ ‘वाटर विला’ का आनंद उठाने के लिए मालदीव जा रहे हैं तो शायद अब आपको वहां जाने की जरूरत न पड़े. मालदीव के वाटर विला की तर्ज पर सरकार भारत में लग्जरी टूरिस्ट डेस्टीनेशन बनाने जा रही है. रईसों के बीच काफी लोकप्रिय इस तरह के लग्जरी टूरिस्ट डेस्टीनेशन बनाने के लिए नीति आयोग ने योजना तैयार की है. इस योजना के तहत लक्षद्वीप और अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह के समुद्री किनारों और समुद्री पानी में वाटर विला बनाए जाएंगे. इस प्रोजेक्ट की लागत करीब 1,500 करोड़ रुपये है. इन विला तक आसान पहुंच के लिए बुनियादी ढांचे का भी विकास किया जाएगा. इन विला के आसपास नए हवाई अड्डों का निर्माण किया जाएगा. साथ ही सी-प्लेन (समुद्री विमानों) की शुरुआत और हेलीकॉप्टर सेवाओं को भी बढ़ाया जाएगा.

एक अधिकारी ने ईटी को बताया, “इस तरह की सात परियोजनाओं के लिए बोलियां आमंत्रित की गई हैं. यह पीपीपी मॉडल (सार्वजनिक-निजी भागीदारी) के आधार पर विकसित किये जाएंगे. सरकार का मकसद दूसरे देशों की तरह भारत में ऐसा प्रमुख पर्यटन स्थल बनाना है.” नीति आयोग ने मिनिकॉय द्वीप, सुहेली द्वीप और लक्षद्वीप के समुद्री पानी के कदमत द्वीप पर 125 कमरे वाले वॉटर विला बनाने का प्रस्ताव दिया है. इसके अलावा आयोग ने 460 लैंड विला बनाने की योजना बनाई है.

ऐसे विला अंडमान एवं निकोबार के लॉन्ग आइलैंड, एव्स आइलैंड, स्मिथ आइलैंड और शहीद द्वीप पर बनाने की योजना है. इस अधिकारी ने कहा, “समझौते को अंतिम रूप दिया जा चुका है. हमें उम्मीद है कि चालू वित्त वर्ष में ही इन परियोजनाओं पर काम शुरू हो जाएगा.” अधिकारी के अनुसार, अयोग ने पहले ही सभी परियोजनाओं के लिए पर्यावरणीय स्वीकृतियां प्राप्त कर ली हैं.

क्या है वाटर और लैंड विला?

वाटर और लैंड विला आमतौर पर समुद्री द्वीपों में काफी प्रचलित हैं. मालदीव में सबसे ज्यादा वॉटर विला हैं जबकि मॉरीशस में भी एक-दो वॉटर विला हैं. वॉटर विला आमतौर पर समुद्री तट या ऐसी जगह बनाए जाते हैं जहां समुद्री पानी एकत्र हो जाता है. आप विला के किनारे बैठकर शार्क जैसे समुद्री जीवों को देख सकते हैं. इसी तरह से लैंड विला समुद्र के किनारे बनाए जाते हैं यहां से आप सीधे समुद्र को निहार सकते हैं.

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