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भारत के इन मंदिरों में पुरुषों को नहीं मिलती एंट्री! क्या आप इनके बारे में जानते हैं?

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हमारे देश में ऐसे कई धार्मिक स्थल हैं जहाँ महिलाओं की एंट्री बैन है। इसे लेकर पिछले कुछ साल से विरोध की आवाजें भी उठ रही हैं और कई जगह कोर्ट ने भी बीच में आकर महिलाओं को हक दिलाया है। हाजी अली, शनि शिग्नापुर और सबरीमाला जैसे धार्मिक स्थल इन्ही वजहों से खबरों में रहे हैं। लेकिन आप ये सुनकर जरूर हैरान हो जाएँगे कि अपने देश में ऐसे भी मंदिर हैं जहाँ या तो पुरुषों की एंट्री पर पूरी तरह बैन है या उन्हें किसी खास समय पर इन मंदिरों में प्रवेश की अनुमति नहीं है। ऐसे मंदिर एक दो नहीं बल्कि इन मंदिरों की पूरी एक लिस्ट है। आइए एक-एक करके आपको बताते हैं ऐसे मंदिरों के बारे में।

1. ब्रह्म देव का मंदिर

राजस्थान के पुष्कर में मौजूद ये मंदिर पूरे भारत में भगवान ब्रह्मा का एकलौता मंदिर है। 14वीं शताब्दी में बने इस मंदिर के अंदरूनी भाग में कोई भी शादीशुदा पुरुष नहीं जा सकता। ऐसी मान्यता है कि देवी सरस्वती के श्राप की वजह से कोई भी शादीशुदा आदमी मुख्य मंदिर में नहीं आ सकता, इसलिए पुरुष इस मंदिर में सिर्फ आंगन तक ही जाते हैं और महिलाएँ अंदर जाकर पूजा करती हैं।

2. कामरूप कामाख्या मंदिर

असम के गुवाहाटी में मौजूद यह मंदिर नीलांचल पर्वत पर बना है। माता के सभी शक्तिपीठों में कामाख्या शक्तिपीठ को सबसे ऊपर रखा जाता है। माता की माहवारी के उत्सव के दौरान इस मंदिर में पुरुषों का आना सख्त मना है। इस दौरान इस मंदिर की पुजारी भी महिला ही होती हैं।

3. अट्टुकाल मंदिर

केरल के इस मंदिर का नाम तो गिनिज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज है क्योंकि यहाँ एक साथ 30 लाख से ज्यादा महिलाओं ने पोंगल उत्सव में भाग लिया था। ये मंदिर महिलाओं को समर्पित है और यहां पोंगल उत्सव बहुत धूमधाम से मनाया जाता है। मंदिर में भद्रकाली देवी की पूजा होती है। ऐसा माना जाता है कि भद्रकाली मंदिर में पोंगल के दौरान 10 दिन तक रहती हैं। पुरुषों को इस मंदिर में आना मना है।

4. भगवती देवी मंदिर

कन्याकुमारी में बने इस मंदिर में माँ भगवती की पूजा होती है। कहा जाता है कि माता यहाँ एक बार तपस्या करने आई थीं ताकि उन्हें भगवान शिव पति के रूप में मिल सकें। माँ भगवती को सन्यास की देवी भी कहा जाता है। सन्यासी पुरुष इस मंदिर के गेट तक तो आ सकते हैं, उसके आगे नहीं। शादीशुदा पुरुषों को मंदिर में प्रवेश की इजाजत नहीं है।

5. चक्कुलाथुकावु मंदिर

केरल का ये चक्कुलाथुकावु मंदिर माँ दुर्गा को समर्पित है। यहाँ हर साल पोंगल के अवसर पर नवंबर/दिसंबर में नारी पूजा होती है। 10 दिन तक चलने वाले इस त्योहार के दौरान कोई भी पुरूष मंदिर में नहीं आ सकते। पूजा के आखिरी दिन को धानु कहा जाता है और इस मौके पर पुरुष पुजारी महिलाओं के पैर धोते हैं।

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